कर्नाटक का जनमत किसके पक्ष में है?

डॉ. नीलम महेंद्र चुनावों के दौरान चलने वाला सस्पेन्स आम तौर पर परिणाम आने के बाद खत्म हो जाता है लेकिन कर्नाटक के चुनावी नतीजों ने सस्पेन्स की इस स्थिति को और लम्बा खींच दिया है। राज्य में जो नतीजे आए हैं और इसके परिणामस्वरूप जो स्थिति निर्मित हुई है और उससे जो बातें स्पष्ट […]

भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब

डॉ. नीलम महेंद्र “साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा दे उड़ाय।। “ कबीर दास जी भले ही यह कह गए हों,लेकिन आज सोशल मीडिया का जमाना है जहाँ किसी भी बात पर ट्रेन्डिंग और ट्रोलिंग का चलन है। कहने का आशय तो आप समझ ही चुके होंगे। जी हाँ, […]

FILM REVIEW : क्या भंसाली निर्दोष हैं?

डॉ. नीलम महेंद्र 26 जनवरी 2018, देश का 69 वाँ गणतंत्र दिवस, भारतीय इतिहास में पहली बार दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित, पूरे देश के लिए गौरव का पल, लेकिन अखबारों की हेडलाइन क्या थीं? समारोह की तैयारियाँ? विदेशी मेहमानों का आगमन और स्वागत? जी नहीं! “देश […]

दम तोड़ती मानवता का रुदन हम कब सुने पायेंगे?

डॉ. नीलम महेंद्र “अपना दर्द तो एक पशु भी महसूस कर लेता है लेकिन जब आँख किसी और के दर्द में भी नम होती हो, तो यह मानवता की पहचान बन जाती है।“ मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का दिल्ली सरकार का फैसला और फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का हरियाणा सरकार […]

आखिर क्यों हम अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहे

डॉ. नीलम महेंद्र 01 दिसंबर 2017,कोलकाता के जीडी बिरला सेन्टर फाँर एजुकेशन में एक चार साल की बच्ची के साथ उसी के स्कूल के पी टी टीचर द्वारा दुष्कर्म। 31 अक्तूबर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोचिंग से लौट रही एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार। इसी साल सितंबर में रेहान स्कूल में एक […]

हदिया जैसी लडकियां लव नहीं जिहाद का शिकार होती हैं

डॉ. नीलम महेंद्र परिवर्तन तो संसार का नियम है। व्यक्ति और समाज के विचारों में परिवर्तन समय और काल के साथ होता रहता है लेकिन जब व्यक्ति से समाज में मूल्यों का परिवर्तन होने लगे तो यह आत्ममंथन का विषय होता है। अखिला अशोकन से हदिया बनी एक लड़की आज देश में एक महिला के […]

देश में न्याय की उम्मीद जगाते हाल के फैसले

डॉ. नीलम महेंद्र/ अभी हाल ही में भारत में कोर्ट द्वारा जिस प्रकार से फैसले दिए जा रहे हैं वो देश में निश्चित ही एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहे हैं। 24 साल पुराने मुम्बई बम धमाकों के लिए अबु सलेम को आजीवन कारावास का फैसला हो या 16 महीने के भीतर ही बिहार […]

35A जैसे दमनकारी कानूनों का बोझ देश क्यों उठाए

डॉ. नीलम महेंद्र/ भारत का हर नागरिक गर्व से कहता कि कश्मीर हमारा है लेकिन फिर ऐसी क्या बात है कि आज तक हम कश्मीर के नहीं हैं? भारत सरकार कश्मीर को सुरक्षा सहायता संरक्षण और विशेष अधिकार तक देती है लेकिन फिर भी भारत के नागरिक के कश्मीर में कोई मौलिक अधिकार भी नहीं […]

खुशियों का फैसला

डॉ. नीलम महेंद्र/ जो भावना मानवता के प्रति अपना फर्ज निभाने से रोकती हो क्या वो धार्मिक भावना हो सकती है? जो सोच किसी औरत के संसार की बुनियाद ही हिला दे क्या वो किसी मजहब की सोच हो सकती है? जब निकाह के लिए लड़की का कुबूलनामा जरूरी होता है तो तलाक में उसके […]

टूरिज्म पर टैरेरिज्म हावी क्यों

डॉ. नीलम महेंद्र@ यह इस देश का दुर्भाग्य है कि बुरहान जैसे आतंकवादी अपने ही देश के मासूम लोगों की जानें लेकर गर्व से उसकी जिम्मेदारी लेते हैं और वहाँ के यूथ आइकान बन जाते हैं लेकिन हमारे जवान किसी पत्थर बाज को आत्मरक्षा के लिए गाड़ी की बोनट पर बैठा कर पुलिस थाने तक […]